रणथंभौर के खूबसूरत किले के भीतर स्थापित गणेश भगवान का मंदिर, जिसमें भगवान गणेश की तीन नेत्रों वाली प्रतिमा उनके पूरे परिवार के साथ स्थापित है। ऐसी मान्यता है कि जब राजा हमीर युद्ध संबंधी और खाद्यान्न संबंधी समस्याओं से घिरे हुए थे तब एक रात भगवान गणेश ने उनके सपने में आकर उन्हें समस्याएं खत्म होने का आश्वासन दिया था।
यह अभ्यारण अविश्वसनीय स्थानों में से एक है, जो प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र से भरा हुआ है। इस अभ्यारण में चंबल नदी के लहरों को देख सकते हैं, उसमें बोट राइडिंग का आनंद उठा सकते हैं। यहां पर आप सफारी का आनंद ले सकते हैं, मगरमच्छ को देख सकते हैं।
यह किला अत्यंत प्राचीन और अद्भुत है। रणथंभौर टूरिज्म की लिस्ट में सबसे ऊपर इसी किले का नाम आता है। भगवान गणेश का त्रिनेत्र मंदिर भी इसी किले में स्थापित है। विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के कारण भी इसका महत्व है।
रणथंभौर के सबसे लोकप्रिय स्थानों में से एक जोगी महल यह महल पद्म झील के ठीक बगल में स्थित है। ऐसा माना जाता है कि प्राचीन काल में जयपुर राजघराने के राजा महाराजा यहां शिकार खेलने आते थे। उसके बाद यह महल पर्यटकों के रुकने का स्थान बना और वर्तमान में यह राजस्थानी वास्तुकला का एक अच्छा उदाहरण है। इस महल में स्थित एक बहुत विशाल बरगद का पेड़ है, जो कि देश के सबसे पुराने और बड़े बरगद के पेड़ों में से एक है।
दुर्लभ प्रकार के कई प्रजातियों के पक्षी जानवर इस झील के आसपास सुबह और शाम के समय आते हैं। यहां पर आप सांभर नामक जानवर को देख सकते हैं। यह जानवर आपको इस तालाब के आसपास बहुत आसानी से दिख जाएगा।
रणथंभौर नेशनल पार्क अरावली और विंध्य पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित है। इस नेशनल पार्क में बाघ, जंगली सूअर, हाइना, सांभर, हिरण जैसी कई जीव जंतुओं की प्रजातियां पाई जाती हैं। इस नेशनल पार्क में पक्षियों की 260 से अधिक प्रजातियां उपलब्ध है।
यह झील रणथंभौर वाइल्डलाइफ सेंचुरी की सबसे बड़ी झील है और यहां के जीव जंतुओं के लिए पानी का सबसे बड़ा स्रोत है।
यह तीन मंजिला इमारत है लेकिन पर्यटकों की पहुंच केवल ग्राउंड फ्लोर तक ही है। प्राकृतिक इतिहास का क्षेत्रीय संग्रहालय, सवाई माधोपुर या राजीव गांधी क्षेत्रीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय, सवाई माधोपुर भारत के पश्चिमी क्षेत्र के पौधों, जानवरों और भूविज्ञान पर प्रदर्श के साथ सवाई माधोपुर, भारत में प्राकृतिक इतिहास का देश का चौथा क्षेत्रीय संग्रहालय है।
इस छतरी को हमीर चौहान ने अपने पिता के मृत्यु के पश्चात बनाया था। पिता के समाधि पर लाल पत्थरों से यह छतरी बनाया गया है, जो 50 फीट ऊंची है और 32 स्तंभों पर स्थित है। इस छतरी में काले और भूरे रंग से निर्मित एक शिवलिंग भी स्थित है। माना जाता है इसी छतरी में बैठकर हमीर देव न्याय करता था, जिस कारण इस छतरी को न्याय की छतरी भी कहा जाता है।
रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के 3 झिलों में से यह सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र है और रणथंभौर में घूमने लायक स्थानों में से एक माना जाता है। झील को देखने के लिए यहां पर सुबह और शाम अलग-अलग दो समय पर पर्यटको के लिए खुलती है।